डेनमार्क के कोपेनहेगन में 7वां यूरोपीय राजनीतिक समुदाय (European Political Community –EPC) शिखर सम्मेलन 02 अक्टूबर 2025 से आयोजित हो रहा है। इस बैठक में यूरोपीय संघ के 27 देशों के साथ लगभग 20 अन्य यूरोपीय देशों के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाग ले रहे है।
European Political Community (EPC) क्या है:
यूरोपीय राजनीतिक समुदाय (EPC) एक ऐसा मंच है जहां यूरोपीय देशों के सदस्य, गैर सदस्य, और अन्य सहयोगी देश मिलकर राजनीतिक संवाद, रणनीतिक असमृद्धियों, सुरक्षा व स्थिरता की चुनौती पर विचार करते है। यह NATO या EU जैसे औपचारिक संगठन नहीं है, बल्क्ि संवाद और समन्वय मंच है। जिसके अंतर्गत यूरोपीय संघ के 27 देश और लगभग 20 गैर सदस्य देशों के साझेदार को शामिल किया जाता है।
शिखर सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य:
- इस शिखर सम्मेलन का मुख्य फोकस यूरोप के सामने मौजूदा राजनैतिक चुनौतियों और सुरक्षा पर है। जिसमें रूस के साथ जारी यूक्रेन के युद्ध को देखते हुए यूक्रेन के प्रति समर्थन को और मजबूत करना।
- यूरोप में सामान्य सुरक्षा स्थिति, जिसमें पारंपरिक और हाइब्रिड खतरे, साइबर हमले, आदि पर विचार-विमर्श किया गया।
- यूरोप के भविष्य को आकार देने के लिए महाद्वीप के सभी देशों के बीच साझा समझौता और रणनीतिक हितों को बढ़ावा देना।
- यूरोप में प्रवासन (Migration) से संबंधित चुनौतियों का समाधान करना और अन्य देशों पर यूरोप की निर्भरता को कम करने सहित आर्थिक सुरक्षा के महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर जोर देना ।
विश्व पर संभावित प्रभाव :-
- यूरोपीय राजनीतिक समुदाय (EPC) के सदस्य देशों के बीच रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को और कड़ा करने की सहमति बन सकती है, जिससे वैश्विक बजारों में उतार-चढाव देखने को मिल सकता है, खासकर ऊर्जा के क्षेत्र में।
- यूरोप द्वारा वैश्विक आर्थिक निर्भरता को कम करने और लचीली आपूर्ति बनाने के प्रयास से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश में बदलाव आ सकता है।
- EPC सदस्य समूहों के मध्य आपकी करीबी से वैश्विक नीति में सामूहिक दृष्टिकोण तेज होगा, जिससे गैर-यूरोपीय देश जैसे ब्रिटेन भी इस मंच के जरिए यूरोप से अपने संबंध प्रगतिशील बनाने में प्रयत्नशील है।
- यूरोपीय राजनीतिक समुदाय सुरक्षा की दृष्टि से अमेरिका पर अपनी सुरक्षा की निर्भरता को कम करने और अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने पर बल दिया गया। जिसका असर वैश्विक सुरक्षा समीकरणों पर होगा।
भारत पर संभावित प्रभाव :
यूरोपीय राजनीतिक समुदाय शिखर सम्मेलन में सीधे तौर पर भारत न इसका सदस्य देश है और न गैर सदस्य देश, फिर भी इस शिखर सम्मेलन से होने वाले परिणाम से भारत और वैश्विक प्रभाव पड़ते है, जैसे:
- यूरोपीय संघ और भारत के Free Trade Agreement (FTA) की हो रही चर्चा पर इसका असर होगा, क्योकि यूरोपीय संघ द्वारा चीन पर निर्भरता कम करने के लिए अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने के लिए भारत महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में उभर रहा है।
- भारत के साथ EPC देश सुरक्षा और रक्षा भागीदारी को विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है, जिससे भारत के लिए रक्षा के क्षेत्र की नई प्रौद्योगिकी का रास्ता खुल जाएगा और रूस पर निर्भरता कम हो जाएगी।
- भारत को यूरोपीय संघ ग्लोबल साउथ में एक प्रमुख खिलाड़ी मानता है, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा हितो और सहयोग को आगे बढाने का अवसर प्रदान करती है।
- यह बैठक केवल यूरोप ही नहीं, पूरे वैश्विक राजीनति और सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर रही है।, जो यूरोप के भविष्य की दिशा को निर्धारित करने और वैश्विक सुरक्षा व आर्थिक स्थिरता में उसकी भूमिका को मजबूत करता है। जिसका असर न केवल भारत पर अपितु पूरे वैश्विक देशों में देखने को मिलेगा।
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